Header Ads

वैज्ञानिकों ने आपके घर की महिलाओं के बारे में एक नया गुण उजागर किया

ROCHAK

यह बात जग जाहिर है कि पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं लंबे समय तक जीवित रहती हैं यानी दुनिया में महिलाओं की औसत उम्र पुरुषों से अधिक होती है। अब एक नए शोध ने यह भी प्रमाणित कर दिया है कि बुरे समय या संकट के समय में भी जिंदगी जीने में महिलाएं आगे हैं। यह शोध जर्मनी और डेनमार्क में हुआ है जिसमें शोधकर्ताओं ने मनुष्यों के जीवन जीने की औसम उम्र की ऐतिहासिकता को परखते हुए यह निष्कर्ष निकाला है। शोध में कहा गया है महिलाएं अकाल, महामारी जैसी आपदाओं को झेलने में पुरुषों से ज्यादा सक्षम होती हैं। इन आपात स्थितियों के दौरान पुरुषों की मौत जल्दी हो जाती है जबकि महिलाएं लंबे समय तक इन मुसीबतों का सामना करते हुए जीवित रहती हैं। महिलाओं के अंदर यह क्षमती होती है कि वे भुखमरी, बीमारियां की महामारी जैसे प्राकृतिक आपदाओं को पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा बहादुरी से झेलती हैं यानी बड़े पैमाने होनेवाली मौतों के बीच महिलाएं अपने आप को बचा लेती हैं ज‌बकि पुरुष घुटने टेक देते हैं और मौत के शिकार हो जाते हैं। इस विषय पर शोध करनेवाले वैज्ञानिकों ने अपनी बात को और पुख्ता करने के लिए दुनिया में सात बड़े संकटों का ‌अध्ययन करने का निर्णय किया। उन्होंने दुनिया भर में 1772 और 1939 के बीच आए संकटों के ऐतिहासिक आंकडों का विश्लेषण करने की ठानी। इन वर्षों के दौरान बहुत बड़ी आपदा के रूप में कुछ देशों में आई भुखमरी, बीमारी की महामारी, अकाल और गुलामी जैसी आपदाओं के दौरान हुई मौतों के आंकडों का विश्लेषण किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि इन वर्षों के दौरान मनुष्यों के जीवित रहने की संभावना काफी कम हो गई थी और पुरुष एवं महिला दोनों के जीने की औसत उम्र 20 साल रह गई थी। इस अवधि के दौरान भी महिलाओं में जीने की क्षमता अधिक पाई गई और वे पुरुषों की तुलना में छह माह से चार साल तक अधिक जीती रहीं। अपने शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया ‌कि महिलाओं के अंदर लंबे समय तक जीने की क्षमता की ताकत उन्हें पैदाइशी मिली हुई है। हर जगह‌ यह पाया जाता है कि शिशुओं की मौत दर के आंकड़े बताते हैं कि नवजात अवस्‍था में पुरुष शिशुओं की मौत अधिक होती है जबकि बच्चियों की मौत कम होती है। यही ताकत है जो ‌महिलाओं को हर हाल में जीवित रहने की शक्ति देती है।

No comments